“आओ, हम यहोवा की ओर फिरें” होशे 6:1

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कोविड 19 महामारी दुनिया भर में, खासकर भारत में व्याप्त है। दूसरी लहर पहली लहर से ज्यादा भयानक होती है। राष्ट्र के नेता, शासक और चिकित्सा आपूर्ति सभी विफल और निष्क्रिय हैं। भारत अब पहली लहर में अमेरिका से भी बदतर स्थिति का सामना कर रहा है। हर दिन मरने वालों की संख्या हजारों तक पहुंच गई है। इस मौके पर दुनियाभर से दुआएं आ रही हैं। अब यही एकमात्र उपाय है। परमेश्वर के अलावा कोई कुछ नहीं कर सकता। उसने कहा: “यहोवा, सब प्राणियों का परमेश्वर है। (यिर्मयाह 32:27) ओल्ड टेस्टामेंट इज़राइल एक ऐसी ही स्थिति से गुजरा है। शायद यह इस तरह की महामारी नहीं थी। परन्तु होशे भविष्यद्वक्ता के समय में, इस्राएल की कलीसिया इतने बड़े संकट से गुज़री कि उनके परमेश्वर यहोवा के सिवा और कोई कुछ न कर सका। उस अवसर पर इस्राएल की कलीसिया के लिए होशे के शब्दों का एक अंश है जो हम यहां चर्चा कर रहे हैं। चलो आओ यहोवा के पास आओ। उसने हमारे टुकड़े-टुकड़े कर दिए हैं। वह चंगा करेगा, और वह हम पर प्रहार करेगा। वह घावों को भर देगा” होशे ६:१ एक चर्च, राष्ट्र और समुदाय के रूप में कठोर वातावरण से गुजरने के कारण होशे का एक अलग दृष्टिकोण था।

यह परमेश्वर का हाथ है और इससे हमें परमेश्वर के अलावा कोई नहीं बचा सकता है। यह स्वीकार करते हुए होशे लोगों से परमेश्वर के पास लौटने का आह्वान कर रहा है। अंग्रेजी में “रिटर्न” शब्द का प्रयोग किया है। यानी वापस आ जाओ। होशे द्वारा बोले गए “वापसी” शब्द का अर्थ समझने के लिए हमें उस समय इस्राएल कलीसिया की स्थिति को समझने की आवश्यकता है।

होशे अध्याय ४ के १ पद से १२ पद तक उस समय की उनकी वास्तविक स्थिति का वर्णन है। पूरे चौथे अध्याय में उनके कुकर्मों का वर्णन है। इस स्थिति में, होशे कहता है कि परमेश्वर ने हमें दण्ड दिया है और हमें परमेश्वर के पास वापस जाना चाहिए। “उसने हमें काटा है” जी हाँ, होशे ने स्वीकार किया कि परमेश्वर ने हमें काटा है।फट गया है। वह अपने आप ठीक करेगा। इस एहसास के साथ कि परमेश्वर ने उन्हें दण्ड दिया है साथ ही, परमेश्वर हमें सुधारता है, बिना विद्रोह के, बिना किसी शिकायत के, और परमेश्वर के अनुशासन के तहत उनकी ओर लौटा। यह एक प्रार्थना है जो अनुशासन के बीच परमेश्वर के प्रेम पर निर्भर करती है। प्रतिस्पर्धी बच्चे हमेशा कहेंगे कि उनके माता-पिता उनसे प्यार नहीं करते। लेकिन ऐसा नहीं है। अपने विरोध और नम्रता के कारण अपने माता-पिता के प्यार को वे महसूस नहीं कर पा रहे है। होशे ने लोगों को परमेश्वर की ओर फिरने और लौटने के लिए बुलया है।

आज हम जिस संकट का सामना कर रहे हैं, उसके वजह से हमें भी वापसी की जरूरत है। पिछला २ सालों पहले की हमारी स्थिति पर आइए एक नजर डालते हैं । हमारे उत्सव, आराधना, सम्मेलन, शादी, अंत्येष्टि … के द्वारा क्या हम सचमुच परमेश्वर को प्रसन्न कर रहे थे? क्या परमेश्वर को हमारे कार्यों में महिमा मिली? हम अपने आध्यात्मिक “नृत्य” या नाटकों के माध्यम से परमेश्वर को क्रोध नहीं दिला रहे थे? क्या यह कष्टप्रद नहीं था? हमारी पसंद में दुनिया के सारे चीजें हम ने कलीसिया के अंदर लाया। इज़राइल के मामले में क्या हमारी स्थिति इससे अलग थी? (होशे 4:1) क्या हमारे बीच ऐसा नहीं था? वे कसम खाते हैं, झूठ बोलता है, हत्या करता है, चोरी करता है, व्यभिचार करता है, घर काटता है …. इसलिए भूमि…. (होशे 4: 2-3) जब दुनिया के राष्ट्रों या देश के निवासियों ने यह सब किया क्या यह चर्च में नहीं हुआ जो अपने ही लोग होने का दावा करते है? कितने झूठे व्यक्ति के आंकड़े? प्रभु के नाम से क्या कुछ नही किया जो झूठ और अधर्म था? हमारे शादियों में कितने बड़े लक्ज़री दिखाया हम ने? कितने ऐसे मां बाप थे जो उनकी बेटी को गरीब होने के कारण शादी नही करा पाया। वहां दूसरे तरफ कितने थे जो अपने बेटे बेटियों के शादी में पैसा उड़ाकर अपना पैसे के ताकत दिखाया?? हम पिछले दिनों में हमारे त्योहार और शादियों के द्वारा भी प्रभु परमेश्वर को क्रोधित किया।

वर्तमान स्थिति क्या है? 50 से अधिक लोग शादी में इकट्ठा नहीं हो सकते है। मनुष्य के गर्व, चालाक और विलासिता के लिए परमेश्वर ने रास्ता निकाला। सब को अंदर बंद कर दिया गया। कलिस्या बंद, त्योहार बंद, शादी बंद, और तो और किसी के मौत में भी 10 लोगों से ज्यादा इकट्ठा नही हो सकते है।

परमेश्वर यह सब देख रहे थे। नया नियम की कलीसिया भी प्रभु की ओर वापस आएं। परमेश्वर की ओर मुड़ें। हमारे अच्छे समय या वर्तमान से पहले, हमारे पास परमेश्वर और उसकी आज्ञाएँ थी। हम ने वचन को टेडा मेड़ा करके या दूध में पानी मिलाकर पिलाना शुरू किया। हमारे आम सभाओं में और संगति में केवल बहुतायत के सुसमाचार की घोषणा की गई थी। यह सिखाने लगा कि जिन लोगों के पास परमेश्वर की आशीष है, वे हैं जिनके पास धन और दौलत है। कहने और सिखाने लगे कि अध्यात्मवादी वे हैं जिनके पास भौतिक गुण और उन्नयन हैं। पश्चाताप, मन फिराव, अलगता और पवित्रता का सिद्धांत (डॉक्ट्रीन) उपदेश सुनने के लिए लापता। सम्मेलन केवल बैठकें बन गए। क्योंकि चर्च इस सिद्धांत में पतित हो गया है कि एकमात्र योग्यता पैसा है। इस प्रकार धर्मनिरपेक्षता ने सभी स्तरों पर चर्च में प्रवेश किया। दुनिया ने चर्च को पूरी तरह से निगल लिया।

यद्यपि परमेश्वर ने कलीसिया को वापस आने और पश्चाताप करने का समय दिया, फिर भी नए नियम की कलीसिया वापस नहीं आई। फिर परमेश्वर ने ताला लगा दिया। चर्च में केवल भक्ति के भेष में बंधे थे। ईश्वर का भय मिट गया। उत्सव सब खत्म हो गया है। मौत को भी जश्न में बदलने वाले अब किसी की मौत में भी नहीं जा सकते है। जाने में डर लगता है। तो सब पर ताला लग गया। यह संकट मानव निर्मित है, या ईश्वर द्वारा भेजा गया है, या ईश्वर ने मनुष्य को अनुमति दी हो, एक बात पक्की है, हम नहीं जानते। न्यू टेस्टामेंट चर्च के पश्चाताप के साथ प्रभु की ओर लौटे।

इस महामारी में परमेश्वर का उद्देश्य यही है। होशे ओल्ड टेस्टामेंट चर्च से कह रहा है आओ, हम यहोवा के पास चलें। उसने हमें फाड़ा है…. वह हमें चंगा करेगा.. हाँ, इस युग में भी नए नियम की कलीसिया का यही संदेश है… कलीसिया परमेश्वर के पास लौट आए। कलीसिया सभी छल, झूठ और सांसारिकता को त्याग दे और परमेश्वर के वचन की पवित्रता, अलगाव और पवित्रता की ओर लौट आए। याद रखें कि आप किस चीज से गिरे हैं: पश्चाताप करें और पहला काम करें। नहीं तो मैं आऊंगा, और यदि तू न पछताएगा, तो तेरा दीपक उसके स्थान से हटा दिया जाएगा” (प्रकाशितवाक्य २:५) ऊपर उद्धृत पद में पश्चाताप शब्द का 2 बार प्रयोग हुआ है। हाँ, परमेश्वर के पास वापस आओ। आइए हम ईश्वरीय सिद्धांतों पर लौटते हैं। आइए हम अलगाव और पवित्रता की ओर लौटें। तब हम प्रार्थना करें, हे प्रभु, कि हमारे पास पहले की तरह एक अच्छा समय हो। “आओ, हम यहोवा की ओर फिरें, क्योंकि उस ने हम को फाड़ डाला है। वह हमें ठीक करेगा। उसने हमें पीटा है। वह घाव पर पट्टी बांध देगा ”

पादरी सी जॉन (दिल्ली)

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