परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी बने रहना

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जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वह बुद्धि और ज्ञान और आनन्द देता है; परन्तु पापी को वह दु:खभरा काम ही देता है।
सभोपदेशक 2:26

मसीह में आपको जय मसीह की, प्रिय दोस्त आप जानते हैं कि हम मनुष्य की नज़र में अधर्मी होकर भी धर्मी बनते हैं और दिखावटी जीवन जीते है। हम लोगों की नज़र में धर्मी तो बने रहते हैं पर हमारा अंदरुनी मनुष्य हमें दोषी ठहराता है और यही हमें आत्मा में पंगु (पैरालाइज) करता है। जिससे हम निर्जीव रहते हैं और हमारी आत्मिक क्रियाएं बंद हो जाती है, और हम यह नहीं जान पाते कि यह कैसे होता है जिससे हम सुधार को कभी भी अपना नहीं पाते। हम कभी भी यह अभिषिक्त लोगों की कहानी न जानकर उनके कार्यों को ही जानकर अपने जीवन को असमंजस में जीते हैं। हम यह चाहते हैं कि मैं भी उनका अनुसरण करूंगा। जैसे वे जीवन जीते हैं बिल्कुल हम वैसा ही अभ्यास करते हैं, लेकिन हम अभ्यास के पीछे की गहराई और त्याग को कभी भी पढ़ते और जानने की इच्छा जागृत नहीं करते। कहा गया है कि जब हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीते हैं तो वो हमें आत्मिक उन्माद से भरता है। जब हम परमेश्वर को अपना स्रोत मानते हैं तो हम दिखावटी जीवन नहीं जीते और पाप का अस्तित्व धीरे धीरे आपके परीक्षा में सफल होने पर मिटता जाता है और आप ज्ञान, आनंद और बुद्धि परमेश्वर से प्राप्त करते हैं और आपको यह मालूम होता है कि आपका स्रोत परमेश्वर है। लेकिन दिखावटी और पाप में जी रहे वचन के अनुसार हमेशा परमेश्वर की ओर से दुखभरे काम पाते हैं। अगर आप इस वचन को ग्रहण करते हैं तो आप आज यीशु के नाम से आशिशित हैं। मसीह में आपको आनंद और शांति मिलती रहे।आमीन।

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