“परमेश्वर का मार्ग अपनाना”

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हम सब मनुष्य के सामने हमेशा दो मार्ग होते हैं। यह हमे तय करना हैं, की हम किस मार्ग पर चले। जब हमारे जीवन में, समस्या आती हैं, दुःख आता हैं, चिंताए आती हैं, तो हम परमेश्वर की और से मन फिराते हैं। और संसार मे अपने सुख को दूँढते हैं। आप जानते हैं की संसार का सुख पलभर का होता हैं फिर भी हम जानकर भी हम अंजान बनते हैं।

जब हम परमेश्वर का मार्ग छोडते हैं, तो पहले से ही ज्यादा हमारे जीवन में दुःख और समस्या आती हैं। हम बुरे कार्य करते हैं, दल-दल के किच मे गिरते हैं, जहॉ से निकलना मुश्किल होता हैं।

बाईबल में हम देखते हैं, की एक पिता से उसका पुत्र उसके हिस्से का सारा धन लेकर दूर देश में गया। उसने सारा धन कुकर्म में उड़ाया। उस देश मै अकाल पड़ा,तो वह लौटकर अपने पिता के पास आया।
पिताने उस पर तरस खाकर, उसे चुमा और गले लगाया, और कहा की मेरा पुत्र मर गया था और अभी जीवित है।

तो आप सोचे की, संसार का पिता सब भूलकर हमे माफ करता है, तो हमारा स्वर्गीय पिता हमे माफ नही कर सकता? वह हमसे बहुत प्यार करता है, वह हमारे लिये कृस पर बहुत यातना, दुःख सहा, और पवित्र लाहु देकर हमे खरीदा हैं।

उसका वचन कहता है की, “में सब प्राणीमात्रा का परमेश्वर हूं क्या मेरे लिये कोई काम कठीण है।” वह असंभव को संभव करने वाला सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमारे साथ है, तो हमे स्थिर रहना चाहिये।

हम सब मिलकर उसके मार्ग पर चलाने का निर्णय लेगें क्योंकि जय हमारी ही है।

आप सभीको परमेश्वर हर एक बुराई से बचाये, और उसका अनुग्रह सदैव आपके साथ रहे। अमीन

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