परमेश्वर का प्रेम

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आकाश और पृथ्वी का कर्त, आदि और अंत, अल्फा और ओमेगा,मार्ग सतय और जीवन,जो है वह हमारा परमेश्वर है।

वह सारी सृषिटी का रचनेवाला,सर्वशक्तिमान,सर्व सामर्थ, राजा ओ का राजा,प्रभु ओ का प्रभु हमारा जीवित खुदा है।हुमे उसने अपने पवित्र हाथो से रचाया है।और जीवन का श्वास दिया है।हम उसकी संतान है।वह हमसे माँ से भी बढ़कर प्रेम करता है।उसने कभी पक्षपात नही किया।उसने कभी आमिर-गरीब,काला-गोरा, छोटा-बड़ा कही भी उसने हम में तुलना नही की।

वह हमारे कारण कंगाल बना ताकि हम धनी हो जाये।उसने हमे हर एक बीमारी,अपघात, शैतान की चाल-ढाल से बचाया हैं, उसकी नज़र हर पल,हर समय हम पर होती है। वह कहता हैं की जो हम में छूता है,वह उसकी आंखों की पुतली छूता है।

तो हमे भी उसके साथ एकनिष्ठ होना चहिये। उसका वचन कहता हैं की, “मुनष्य तो बाहर का रूप देखता है,परंतू परमेश्वर की नज़र मंन पर होती है”।

इसीलिए हमे उसके साथ खिलवाड़ नही करनी चहिये। हमे उसकी भलाई ,उसके उपकार,उसकी आशीष को हमेशा समरण करके उसे धन्यवाद देना चहिये।

आप सभी को येशु के नाम से,शांति,आनंद,और बहुताया से आशीष मिले। अमीन

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