जीवनरुपी देह का मंदिर पवित्र रखने के लिये सात सूत्र:-

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1.(प्रार्थना) निरंतर प्रार्थना करे।
प्रार्थना कि शुरूआत :-उत्पत्ति 4:25
मरकुस 13:33:-देखो, जागते और प्रार्थना करते रहो; क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आएगा।
मत्ती 26:41:-जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो! आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है।”
लूका 22:46:-और उनसे कहा, “क्यों सोते हो? उठो, प्रार्थना करो, कि परीक्षा में न पड़ो।”

2.(वचन का ध्यान)वचनो के साथ समय बिताये और वचनो का ध्यान और मनन करे।
•निर्गमन 15:26:-“यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैंने मिस्रियों पर भेजे हैं उनमें से एक भी तुझ पर न भेजूँगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूँ।”
•व्यवस्थाविवरण 13:4:-तुम अपने परमेश्वर यहोवा के पीछे चलना, और उसका भय मानना, और उसकी आज्ञाओं पर चलना, और उसका वचन मानना, और उसकी सेवा करना, और उसी से लिपटे रहना।
•भजन संहिता 12:6:-यहोवा का वचन पवित्र है, उस चाँदी के समान जो भट्ठी में मिट्टी पर ताई गई, और सात बार निर्मल की गई हो।
•नीतिवचन 16:20:-जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
•यूहन्ना 1:1:-आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।
•यूहन्ना 17:17:-सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है।
•प्रकाशितवाक्य 21:5:-और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, “मैं सब कुछ नया कर देता हूँ।” फिर उसने कहा, “लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वासयोग्य और सत्य हैं।”

3.(परमेश्वर की आराधना) स्तुति

आराधना मे परमेश्वर की उपस्थिती होती है, सामर्थ होता है इसिलीये आराधना मे समय बिताये। परमेश्वर की निरंतर स्तुति करे।
•भजन संहिता 100:2:-आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
•यूहन्ना 4:24:-परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसकी आराधना करनेवाले आत्मा और सच्चाई से आराधना करें।”

4.(आंखो से वाचा) आँख शरीर का दिया है इसिलीये अपनी आँखो को गलत चीजें देखने से दूर रखिये। आँखो से भी पाप ना हो।
•यशायाह 33:15:-जो धार्मिकता से चलता और सीधी बातें बोलता; जो अंधेर के लाभ से घृणा करता, जो घूस नहीं लेता; जो खून की बात सुनने से कान बन्द करता, और बुराई देखने से आँख मूँद लेता है। वही ऊँचे स्थानों में निवास करेगा।
•मत्ती 6:22:-“शरीर का दीया आँख है: इसलिए यदि तेरी आँख अच्छी हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा।
•प्रकाशितवाक्य 1:7:-देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है; और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था, वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे। हाँ। आमीन।

5.(शरीर से वाचा) हमारा शरीर प्रभू यीशु मसीह ने अपना अनमोल लहू देकर खरीद लिया है। हमारा शरीर पवित्र आत्मा का मंदिर है इसिलीये अपने शरीर को पापों से बचाये।
•अय्यूब 19:26:-और अपनी खाल के इस प्रकार नाश हो जाने के बाद भी, मैं शरीर में होकर परमेश्वर का दर्शन पाऊँगा।

6.(जीभ से (मुंह) वाचा) अपने मुंह से कोई भी गंदी बाते, अपशब्द, गलत बाते मत बोलिये। गाली मत दो। सिर्फ आशिषित बाते बोलिये।
•भजन संहिता 34:13:-अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुँह की चौकसी कर कि उससे छल की बात न निकले।
•भजन संहिता 39:1:-मैंने कहा, “मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूँगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे सामने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुँह बन्द किए रहूँगा।”

7.(हृदय से वाचा) अपने हृदय मे किसी के लिये कडवाहट ना रखे। किसीके भी प्रति आपके दिल मे क्रोध है, गुस्सा है, जलन है, तो उन सभी चीजों को दिल से निकाल दीजिये। परमेश्वर का वचन अपने दिल मे अधिकाई से बसने दीजिये।
•गलातियों 5:26:-हम घमण्डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

ऊपर दिये गये हर सूत्र को याद रखे और उसके अनुसार अपना जीवन निष्कलंक, शुद्ध और पवित्र रखे।
प्रभु आप सभी को बहुतायत से आशिष दे। आमीन…

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