बन्दीगृह में स्तुति

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हर बात में धन्यवाद करो;क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।(1 थिस्सलुनीकियों ५:१८)

अगर किसी के पास उदास होने का कारण था,तो वह पौलुस और सीलास। वे सुसमचार का प्रचार कर रहे थे और इसके लिए उन्हें पकड़ा गया, पीटा गया और उनके कपड़े फाड़ दिये गए,और जंजीरों से बांधकर बंदी-गृह में डाल दिया गया और अपराधियों के रूप में शर्मिंदा किया गया।

फिर भी,उन्होंने अपनी परिस्तिथियों के कारण उन्हें परमेश्वर की
भविष्वाणी पर सवाल उठाने की अनुमति नही दी। एक हताश स्तिथि को देखने के बजाय, उन्होंने परमेश्वर के उद्देश्यों पर भरोसा किया। उनकी घावों से खून बह रहा था, पर वे परमेश्वर का भजन गा रहे थे।

आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे, और क़ैदी उनकी सुन रहे थे

बंदी-गृह में उनकी स्तुति ने परमेश्वर के लिए उस फिलिप्पी जेल में कुछ अविश्वसनीय करने का रास्ता तैयार किया।

क्योंकि इतने में एकाएक बड़ा भुईंडोल हुआ,यहा तक कि बंदी-गृह की नेव हिल गई, और तुरन्त सब द्वार खुल गए; और सब के बंधन खुल पड़े।

१)बंदी-गृह की नींव हिल गई थी।
२)सभी द्वार खुले गए थे।
३)सब के बंधन खुल पड़े।

उसकी स्तुति प्रशंसा से न केवल उनके द्वार को खोले बल्कि ‘सभी’ के द्वार खुल गए।उनकी स्तुति प्रशंसा ने न केवल उनकी जंजीरों को ढीला कर दिया,बल्कि सभी की जंजीरो को तोड़ दिया।आप प्रभु की स्तुति करने से सभी परिस्तिथियों में द्वार भी खुलेंगे और उन लोगों कि जंजीरो को ढीला करेंगे जो आपके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है।

अगर वे खुसर-पुसर करते और बडबडाते रहते कि एक प्रेम करनेवाला परमेश्वर उन्हे इतनी भयानक जगह पर कैसे जाने दे सकता है, तो उन्हें जेलर और उनके पूरे परिवार को प्रभु की ओर ले जाने का एक मौका नही मिला होता।

आप में से कुछ लोग प्रभु पर आपके विश्वास के कारण तीव्र पीड़ा से गुज़र रहे है। हार मत मानो प्रभु को धारण करो।धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ पड़ती तो है, परन्तु यहोवा उनको उन सब से मुक्त करता है।(भजन ३४:१९)प्रभु की सेवा करना बंद मत करो,लेकिन उनकी स्तुति प्रशंसा करना जारी रखो, आपकी बंदी-गृह स्तुति प्रंशसा का कार्यक्षेत्र में बननेवाला है।

प्रभु आप सभी को आशीष करे, यीशु के नाम में, आमीन।।

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