ओडिशा में धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा 14 वर्षीय ईसाई लड़के की निर्मम हत्या

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भारत जैसे विविधता से परिपूर्ण देश में जहाँ विभिन्न धर्म, जाति और भाषाओं के लोग साथ मिलकर रहते हैं, लेकिन कुछ के वर्षों में कुछ धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, इस प्रकार की घटनाएं अब आम हो चली है इसपर अंकुश लगता नहीं दिख रहा है. इसी कड़ी में एक और घटना सामने आई है जो कि भारत के पूर्वी राज्य उड़ीसा की है, जहाँ पर धार्मिक कट्टरपंथियों ने एक 14 वर्षीय ईसाई लड़के की हत्या कर दी.

मलकानगिरी के पादरी बिजय ने बताया कि घटना 04/06/2020 की रात की है जहाँ कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों ने ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार किया और ईसाईयों के अपहरण का प्रयास किया. धार्मिक कट्टरपंथियों की ये भीड़ उस गाँव की नहीं बताई जा रही है.

इस हादसे का शिकार हुए ईसाई लड़के का नाम सामारू मदकामी है और वह सातवीं कक्षा का छात्र था. धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा इस नन्ने बच्चे पर कोई रहम ना करते हुए इसके सर को पहले पत्थरों से कुचलकर इसकी गर्दन को काट दिया. हत्यारे अपने इस कुतर्क को छुपाने के लिए दफनाते हुए घटनास्थल से फरार हो गए।

पादरी बिजय के अनुसार ये कोई पहली घटना नहीं है सन 2020 से अब तक कई हमले हो चुके हैं और इसकी 4 से ज्यादा बार शिकायत भी की जा चुकी है. यह घटना मलकानगिरी की तहसील मुदुलीपाड़ा के गाँव केंदुगुड़ा की है. सामारू मदकामी के पिता का नाम उन्गा मदकामी है, जो बेथेल हाउस चर्च में काम करता है. बच्चे की माता का देहांत पहले ही हो चुका था.

पादरी बिजय ने 05/06/2020 को लापता किशोर के बारे में सुबह 9 बजे मलकानगिरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की थी. थाना प्रभारी ने तुरंत कार्यवाही करते हुए उसी रात लगभग 9 बजे तक 10-12 संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया. शिकायत करता के सामने ही पूछताछ करने पर उन्होंने अपना जघन्य अपराध कबूल कर लिया.

इस मामले में पीड़िता के पिता उन्गा मदकामी की ओर से आईपीसी 1860 की धारा 295-ए, 367,506,34, एफआईआर नंबर: 0180, दिनांक 05/06/20 तहत प्राथमिकी दर्ज की। एफआईआर रात 2:20 मिनट पर दर्ज की गई तथा पुलिस इंस्पेक्टर राम प्रसाद नाग को मामले की जांच का ज़िम्मा सोंपा गया है.

अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) की रिपोर्ट को अगर माना जाए तो भारत अब धार्मिक उत्पीड़न के मामले में 10 नंबर पर पहुँच चुका है जो कि 7 वर्ष पहले 31 वें नंबर पर था. धार्मिक उत्पीड़न के मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ वर्ष पहले इराक और अफगानिस्तान सबसे आगे थे मगर अब भारत ने इराक को पीछे कर दिया है और शायद कुछ वर्षों में अफगानिस्तान भी आगे ना रह पाए.

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