24 घंटों में कोरोना के 1718 मामले आए सामने, डबलिंग दर बढ़कर हुई 11 दिन

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BY MANOJ KUMAR

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 1718 नए मामले सामने आए हैं और इसकी वजह से 67 लोगों की मौत हो गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 33050 हो गई है, जबकि रिकवरी दर 25.19 फीसद है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह एक सकारात्मक संकेत है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में पिछले 24 घंटे में 630 लोग कोरोना से ठीक हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 78 लोगों की मौत में ऐसे केस रहे हैं जिन्हें और भी कई बीमारियां थीं। देश का अब डबलिंग दर बढ़कर 11 दिन हो गई है। देश में अब तक कोरोना की वजह से 1074 लोगों की जान जा चुकी है। उन्‍होंने बताया कि जहां तक टेस्टिंग प्रोटोकॉल की बात है हम केवल RT-PCR टेस्ट ही कर रहे हैं।

देश में रोजाना 49 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं- अग्रवाल

लव अग्रवाल ने कहा- रोजाना 49 हजार हजार टेस्ट किए जा रहे हैं। 288 सरकारी प्रयोगशालाएं 97 निजी लैब की चेन के साथ मिलकर काम कर रही हैं और 16 हजार कलेक्शन सेंटर पर सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं। अगले कुछ दिनों में हम अपनी टेस्ट क्षमता एक लाख रोजाना करने पर काम कर रहे हैं। कोरोना की दवा आने में अभी वक्त है, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन प्रभावी सामाजिक दवा के तौर पर काम कर रहे हैं। विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय लगातार इस दिशा में काम कर रहा है, जिससे टेस्टिंग प्रक्रिया को तेज बनाया जा सके।

कोरोना से मृत्यु दर 3.2, सबसे ज्यादा पुरुष मरीजों की मौत

अग्रवाल ने बताया कि कोरोना से मृत्यु दर अन्य देशों की अपेक्षा यहां काफी कम है। यहां कोरोना से मृत्यु दर 3.2 है। गंभीर मरीजों की संख्या भी कम है। देश में जितने भी कोरोना संक्रमित हैं, उनमें से महज 0.33% ही वेंटीलेटर पर हैं जबकि 1.5% मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट हैं। 2.34% मरीज आईसीयू में हैं। मरने वाले कुल मरीजों में सबसे ज्यादा 65% पुरुष थे जबकि 35% महिलाएं थीं। आयु वर्ग के हिसाब से देखें तो 45 साल से नीचे आयु वर्ग के 14% संक्रमितों की मौत हुई है। 45 से 60 साल के 34.8% और 60 साल से अधिक आयु वर्ग के 51.2% मरीजों की मौत हुई है।

राजस्थान में गुरुवार को कोरोना वायरस के 118 नए मामले सामने आए हैं । जोधपुर में 83, जयपुर में 21, अजमेर में 4, चित्तौड़गढ़ में 3, कोटा और टोंक में 2, अलवर, बारां और धौलपुर में एक-एक मामलों का पता चला हैं इसके साथ ही 3 लोगों की मौत हो गई है। राज्य में मरीजों की संख्या बढ़कर 2556 हो गई है और अब तक इस बीमारी से 58 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 836 लोग ठीक हो चुके हैं। नोएडा पुलिस कमिश्नर ने जिला अस्पताल के स्टाफ को PPE किट का वितरण किया। कमिश्नर आलोक सिंह ने कहा कि ये सभी कोरोना वॉरियर्स है जो अस्पताल में सैनिटाइजेशन प्रक्रिया को सुनिश्चित करते हैं। साथ ही भविष्य में भी ये व्यवस्था की जा रही है कि ये सुविधा हमेशा इनके पास रहें।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बताया कि, बिहार स्वास्थ्य विभाग ने कुछ जिलों में कोरोना के लिए लोगों की स्क्रीनिंग के लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाया, जिसमें अपेक्षाकृत अधिक तादात में मामले सामने आए हैं। डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग से उन जिलों में अधिक मामलों की पहचान हुई है।बोंगाईगांव जिले से चार और कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आए हैं। असम में रोगियों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इनमें से 29 को छुट्टी दी गई है और 1 की मौत हो चुकी है। अस्पताल में 11 लोगों का इलाज जारी है। असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह जानकारी दी है।

फंसे लोगों को घर पहुंचाने के लिए राज्य सरकारें इंतजाम करेंगी

गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्यसलिला श्रीवास्तव ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए प्रवासी मजदूर, छात्र और पर्यटक अपने घरों को जा सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकारें बसों का इंतजाम करेंगी। सभी राज्यों को इसके लिए 6 पॉइंट्स की गाइडलाइन का पालन करना होगा। इसमें बताया गया है कि कैसे सरकारें इन फंसे हुए लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का काम कर सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के इस फैसले से देशभर में फंसे करीब 10 लाख से ज्यादा मजदूरों, छात्रों, श्रद्धालुओं, सैलानियों को राहत मिलेगी।

इस गाइडलाइन का करना होगा पालन

सभी राज्य और केंद्र शासित राज्य सरकारें मजदूरों, छात्रों और पर्यटकों को घर भेजे जाने के लिए नोडल अथॉरिटी गठित करें। यही अथॉरिटी अन्य राज्य सरकारों के साथ बातचीत करके फंसे हुए लोगों को भेजने और उन्हें वापस बुलाने का काम करेगी। अथॉरिटी की जिम्मेदारी होगी कि वह फंसे हुए लोगों का रजिस्ट्रेशन कराएं।

अगर कहीं पर कोई समूह फंसा हुआ है और वह अपने मूल निवास स्थान जाना चाहता है तो राज्य सरकारें आपसी सहमति के साथ उन्हें छूट दे सकतीं हैं।

फंसे हुए लोगों की पूरी तरह से मेडिकल जांच होगी। बगैर लक्षण वाले को ही यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी।

जिस बस में लोगों को ले जाने की व्यवस्था होगी उसे पूरी तरह से सैनिटाइज कराया जाएगा और अंदर भी लोगों को बैठाने में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कराया जाएगा।

राज्य सरकारें फंसे हुए लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए खुद रूट तय करेंगी।

घर पहुंचते ही लोगों की जांच होगी। इसके बाद सभी को 14 दिनों का होम क्वारैंटाइन में रहना होगा। इस बीच लोगों को अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु ऐप हमेशा ऑन रखना होगा ताकि उन्हें ट्रेस किया जा सके।

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