अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस के बाद जर्मनी ने भी ठहराया चीन को जिम्मेदार, मांगा 12.4 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा

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BY MANOJ KUAMR

कोरोना संकट को लेकर चीन खिलाफ आवाज लगातार बुलंद होती जा रही है। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस के बाद अब जर्मनी ने भी उसे दुनिया भर में कोरोना की महामारी फैलाने का जिम्मेदार मानते हुए उससे 149 अरब यूरो (162 अरब डालर) का मुआवजा मांगा है। जर्मनी के बड़े अखबार बाइल्ड की ओर से उठाई गई इस मांग से चीन बौखला गया है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 12.4 लाख करोड़ रुपये होती है।

कोरोना से जूझ रहे दुनिया के तमाम देशों में इस बीमारी के पीछे चीन का हाथ होने की चर्चाएं हो रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी आक्रामक होकर इस मामले में चीन का हाथ होने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने वायरस फैलने की जांच कराने की बात कहते हुए चेतावनी दी है कि यदि इसमें चीन का हाथ साबित होता है तो उसे इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी। उधर ब्रिटेन ने अमेरिकी जांच दल के साथ अपने जांचकर्ताओं को भेजने की बात कही है।

ट्रंप ने शनिवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि कोरोना वायरस को चीन में रोका जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जांच में यदि यह बात सामने आती है कि इसे दुनिया भर में जानबूझकर फैलने दिया गया तो इसका नतीजा ठीक नहीं होगा।

इस मामले में चीन की भूमिका को लेकर दुनिया भर में संदेह गहराता जा रहा है। वुहान जहां से इस बीमारी की शुरूआत हुई है, वहां पर इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या में पिछले सप्ताह अचानक पचास फीसद की वृद्धि से लोगों की शंका और बढ़ गई है। इसी के बाद अमेरिका ने कहा कि हम इस बात की जांच कराएंगे कि वायरस वुहान की लैब से दुनियाभर में फैला या वुहान की वेट मार्केट (जीव जंतुओं के बाजार) से जैसा वहां कि सरकार के द्वारा दावा किया जा रहा है।

इसी आरोप-प्रत्यारोप के दौर में जर्मनी के बड़े टेबलायड समाचार पत्र बाइल्ड ने आप-एड पेज पर लेख लिखकर चीन से 149 यूरो के मुआवजे की मांग कर दी। इस मांग को जायज ठहराने के लिए कोरोना महामारी से जर्मनी की अर्थव्यवस्था को हुई क्षति का विभागवार ब्योरा दिया गया है।

“व्हाट चाइना ओस अस” शीर्षक से लिखे गये इस लेख में जर्मनी के पर्यटन उद्योग को 27 अरब यूरो, फिल्म उद्योग को 7.2 अरब यूरो, जर्मन एयर लाइंस लुफ्थांसा को 50 अरब यूरो के नुकसान की बात कही गई है। अखबार ने हिसाब लगाकर बताया है कि यदि जर्मनी की जीडीपी में 4.2 फीसद की गिरावट आती है तो प्रति व्यक्ति 1784 यूरो का घाटा होगा। चीन ने इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हुए कहा कि यह राष्ट्रवाद बढ़ाने वाला और दूसरे देशों के प्रति नफरत पैदा करने वाला लेख है। येरूसलम पोस्ट के मुताबिक लेख छपने के बाद से चीन की सरकार और अखबार के संपादन जूलियन रिचेल्ट के बीच तीखे संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। जूलियन ने चीन के राष्ट्रपति जिन पिंग को निशाने पर लेकर बीमारी की रोकथाम में बरती गई लापरवाही सहित अन्य मुद्दों के लिए तीखा हमला किया है।

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