भारतीय अर्थव्यवस्था में 40 साल में पहली बार आ सकती है मंदी, लॉकडाउन बनेगा कारण

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By Manoj Kumar

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन को आगे बढ़ाने से अर्थव्यवस्था पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस कारण देश की अर्थव्यवस्था में 40 सालों में पहली बार सालाना नकारात्मक ग्रोथ देखने को मिल सकती है। नोमुरा होल्डिंग्स की सोनल वर्मा के अनुसार, लॉकडाउन की अवधि को 21 दिन से 40 दिन तक बढ़ाने के कारण इस समय में 8 फीसद से अधिक प्रत्यक्ष उत्पादन नुकसान होगा।

  वर्मा का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी में 0.4 फीसद की गिरावट रहेगी। पिछली बार हमारी अर्थव्यवस्था में साल 1980 में नकारात्मक ग्रोथ हुई थी। उस समय जीडीपी में 5.2 फीसद का संकूचन हुआ था। नोमुरा में एशिया इकोनॉमिक्स एक्स -जापान की प्रमुख वर्मा ने कहा कि लॉकडाउन के खत्म होने के बाद भी लोगों में डर का एक माहौल बना रहेगा। उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा अंसगठित मजदूरों की आजीविका पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा और कॉरपोरेट व बैंकिंग क्षेत्र के तनाव मे तेज वृद्धि होगी। इससे आगे भी ग्रोथ के बाधित रहने की संभावना है।’

  रिसर्चर सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के अनुसार, 24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद उपभोक्ता धारणा सूचकांक साल 2015 के बाद के निचले स्तर पर आ गया है। 100 आधार वाली यह इंडेक्स 29 मार्च को गिरकर 52 पर आ गई थी। इस तरह इसमें सिर्फ एक सप्ताह में 47 फीसद की गिरावट आई। यह उपभोक्ताओं के सेंटीमेंट्स पर पड़े विपरीत प्रभाव को दर्शा रहा है। यह इंडेक्स मार्च के पहले सप्ताह में 102.5 पर थी।

  सीएमआईई के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश व्यास ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘भविष्य के काफी खराब अनुमान लॉकडाउन के हटने के बाद आर्थिक पुनरुद्धार को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।’ आंकड़े बताते हैं कि लॉकडाउन की आर्थिक कीमत बहुत बड़ी है। लोगों की आय लगभग आधी हो गई है और कईयों को तो जल्द सुधार की उम्मीद नहीं है। वहीं, भारतीय अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता ने कहा, ‘हम वित्त वर्ष 2021 के लिए जीडीपी के अनुमान को घटाकर -4.7 फीसद करते हैं। यह कोरोना वायरस के पहले के हमारे 6 फीसद के अनुमान से 10.7 फीसद प्वाइंट कम है।’

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