Lockdown in India : अब लॉकडाउन में बढ़ेगी और सख्ती, राज्यों को कड़ाई से लागू करने का निर्देश, मरीज वाले इलाके को पूरी तरह सील करना जरूरी

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नई दिल्ली: लॉकडाउन के 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोरोना के नए मरीजों की बढ़ती संख्या ने सरकार के माथे पर बल डाल दिया है। इस बढोत्तरी का सबसे बडा कारण लाकडाउन में नरमी को माना जा रहा है। ऐसे में अब सख्ती दिखेगी। राज्य सरकारों को लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करने और कोरोना के मरीज वाले इलाके में कंटेनमेंट प्लान के अक्षरश: पालन को कहा गया है। केंद्र ने राज्यों को साफ कर दिया है कि लॉकडाउन में जरा भी लापरवाही सारी कोशिशों पर पानी फेर सकता है और फिर स्थिति को संभालना और मुश्किल होगा।

राज्यों और जिला के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी

  स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पिछले हफ्ते तक नए मरीजों का सामने आना स्वाभाविक माना जा रहा था। सरकार यह मान रही थी कि 24 मार्च को लॉकडाउन के पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों में 10-12 दिनों तक इसके लक्षण सामने आते रहेंगे। इस दौरान नए संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ना भी स्वाभाविक माना जा रहा था। लेकिन पिछले दिनों में जो तेजी दिखी उससे साफ हो गया है कि न तो लॉकडाउन का कड़ाई से पालन किया गया और न ही कोरोना मरीज के संपर्क में आने वाले सभी लोगों की पहचान हो सकी। यह राज्यों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की विफलता है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके बाद केंद्र की ओर से राज्यों और जिला के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किये गए हैं।

मरीज वाले इलाके को पूरी तरह सील करना जरूरी

  स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सभी संपर्क की पहचान कर उन्हें क्वारंटाइन करने के साथ ही मरीज वाले इलाके को पूरी तरह सील करना जरूरी है, ताकि वायरस को उस इलाके तक ही सीमित कर उसे फैलने से रोका जा सके। भीलवाड़ा का उदाहरण सबके सामने है, जहां पूरे इलाके को सील कर और लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाकर वायरस को रोकने में सफलता मिली।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुणे का दिया उदाहरण

  बुधवार को लव अग्रवाल ने इस सिलसिले में पुणे जिले के केंद्रीय व कोंधवा के इलाके के पूरी तरह सील करने का उदाहरण दिया। उनके अनुसार पूरे इलाके को सील करने के साथ ही स्थानीय प्रशासन इसके चारो ओर फैले 35 वर्ग किलोमीटर के इलाके में घर-घर जाकर सर्वे कर रहा है। इस सर्वे में सभी नागरिकों का विदेश जाने, किसी कोरोना मरीज से संभावित संपर्क के साथ-साथ पहले से हुई बीमारियों का भी डाटा जुटाया जा रहा है। केरल के पठनथिट्टा जिले में भी ऐसा अभियान शुरू किया गया है।

कोरोना की शुरूआत में ही पहचान हो जाने के बाद बेहतर इलाज संभव

सरकार कोरोना के बढ़ते मरीजों के साथ-साथ मरने वालों की तेजी से बढ़ती संख्या को लेकर भी गंभीर है। वैसे तो सरकार 86 फीसदी मौतों के लिए मरीजों के पहले से डायबटीज, दिल, किडनी और लीवर की बीमारियों को जिम्मेदार मान रही है। लेकिन लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना की शुरूआत में ही पहचान हो जाने के बाद बेहतर इलाज संभव है। कुछ राज्यों में सख्ती शुरू हो गई है। हाटस्पाट को सील किया जा रहा है। केंद्र से सभी राज्यों से अपेक्षा जताई गई है कि इसका इंतजार न करें कि कोई स्थान हाटस्पाट बने। संदेह उत्पन्न होते ही सभी संबंधित कदम उठाएं।

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