मसीही परिवार

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परमेश्वर ने छ: दिन सृष्टि करने के बाद देखा कि, सब कुछ अच्छा है, लेकिन आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं। अत: परमेश्वर ने कहा, “मैं उसके लिए एक सहायक बनाऊंगा जो उस से मेल खाता हो।” आज के समय में परिवारों में कई बातें मेल नहीं खाती इसलिए परिवार टूट कर कांच की तरह बिखर जाते है। परिवार का अर्थ; माता-पिता तथा बच्चे सब आपस में मिलकर खुशी से रहने का स्थान हैं। आज के जमाने में बहुत छोटी-छोटी सी बातों को लेकर झगड़ा शुरू हो जाता है; और आगे चलकर यही छोटे-मोटे मन-मुटाव बड़ी बातें बन जाते है; और परिवार तलाक की कगार तक पहुंच जाता है। इसका मुख्य कारण उस परिवार में परमेश्वर को स्थान नहीं देना है। मसीह के प्रेम से वह लोग बहुत दूर हो जाते है। आदम और हव्वा की सृष्टि करने के बाद परमेश्वर ने आशीष दी, “फूलों फलो और पृथ्वी में फैल जाओ”। धर्मशास्त्र में हम बहुत से परिवारों को देख सकते हैं। प्रेरित पौलुस ने कुलुस्सियों की पत्री में ऐसा लिखा है, “हे पत्नियों अपनी पतियों के अधीन रहो, हे पतियों अपने पत्नी से प्रेम रखो और उनसे कठोरता ना करो”। शादी के बंधन में बंधने के पश्चात अलग-अलग परिवार में बड़े हुए दो व्यक्ति यदि एक दूसरे से प्रेम करते हुए, हर बात में एक-दूसरे से सहमत होकर मसीह के प्रेम में आगे बढ़ें तो एक अच्छा परिवार खड़ा कर सकते हैं। भजन संहिता 128 में भजनकार कहता हैं, `क्या ही धन्य हैं, जो यहोवा का भय मानता है और उसके मार्गों पर चलता है’। उसके तीसरे पद में इस प्रकार लिखा है `तेरे घर के भीतर तेरी स्त्री फलवंत दाखलता सी होगी, तेरी मेज के चारों और तेरे बालक जलपाई के पौधे से होंगे’। परमेश्वर ऐसा परिवार इस दुनिया में देखना चाहते हैं, लेकिन आज की स्थिति बहुत भयानक है। कहीं पति पत्नी की हत्या कर देते हैं, तो कहीं पत्नी अपने पति को धोखा दे देती है। ऐसी बहुत सी बातें आजकल देखने व सुनने को मिलती है। आजकल बच्चे माता-पिता का बिल्कुल आदर नहीं करते। अपने बुजुर्ग माता-पिता को वृद्ध- आश्रम में छोड़ देते हैं। परमेश्वर से डरने वाले और उसकी आराधना सच्चे दिल से करने वाले परिवार ऐसा कभी नहीं कर सकते। इन दिनों हम अपने पहले प्रेम से गिर गये हैं। हमारे समाज का अब अपने आदर्शों पर वापस लौटना बहुत जरूरी है। परिवार का मतलब सब के साथ प्रेम करते हुए, एक दूसरे की सहायता करते हुए शांतिपूर्वक रहकर परमेश्वर की महिमा करना है। ऐसे परिवार को परमेश्वर आशीषित करता है । आज कल की पीढी़ को देखकर अत्यधिक दुख होता है। यहोशू इस प्रकार कहता है `मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूंगा´।

एक अच्छे परिवार के लक्षण यह हैं कि वे एक दूसरे से प्रेम रखते हुए और एक दूसरे की सहायता करते हुए ख़ुशीपूर्वक जीवन यापन करें। प्रेरित पौलुस ने इफिसियों की कलीसिया को 5वें अध्याय के 22-32 पदों में स्पष्ट रूप में लिखा है, ‘पत्नी का अपने पति के अधीन रहना उचित है। पति अपनी पत्नियों को इस तरह प्रेम करें जैसे मसीह ने कलीसिया से प्रेम किया और अपने आपको उसके लिए दे दिया। 28वें पद में इस प्रकार लिखा है, ‘उचित है कि अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखना’। अगर हम ऐसे प्रेम रखेगें तो अपनी पत्नी को कभी मारेगें नहीं, भला-बुरा नहीं कहेगें बल्कि उसके साथ मिलकर चलेंगे। अगर माता-पिता, बच्चे सब मिलकर प्रभु की आज्ञा का पालन करते हुए रहें तो एक अच्छा परिवार बन सकता हैं। इसलिए कहा गया है, ‘बालकों प्रभु में माता-पिता की आज्ञाकारी बनो, क्योंकि ये उचित है’ । और माता पिता से भी कहा गया है कि, ‘अपने बच्चों को रिस ना दिलाओ, परंतु प्रभु की शिक्षा और चेतावनी देते हुए उनका पालन-पोषण करो’। ऐसे परिवार से प्रभु प्रेम करता है । आजकल कई परिवारों के टूटने का कारण यही हैं कि, वे प्रभु की व्यवस्था पर नहीं चलते हैं । यहां एक परिवार का परिचय करवाना चाहूंगी, वह नूह का परिवार है । नूह धर्मी पुरुष और अपने समय के लोगों में खरा था। वह परमेश्वर के साथ-साथ चलता था। हम अनुभव कर सकते है, नूह खरा पुरुष था और अपने बच्चों और परिवार को साथ लेकर चलने वाला व्यक्ति था । इसी वजह से जल प्रलय के समय नूह उसकी पत्नी, उसके तीन पुत्र और उनकी पत्नियां, परिवार के कुल 8 लोग पृथ्वी पर बचे बाकी सभी मर मिटें । बाकी लोग जहाज के अंदर नहीं आये और परमेश्वर की बात पर विश्वास नहीं किया। एक अच्छा परिवार वही है जो परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार चलता है। एक ऐसा परिवार भी बाइबिल में हम देख सकते हैं जो प्रभु की बात ना मानने और तिरस्कार करने के कारण पूर्णतया खत्म हो गया। वह परिवार है; एली और उसके पुत्रों का। पहला शमूएल 2:12-17 में हम देख सकते हैं कि एली के पुत्र क्या करते थे? 22-25 में तो वह पुत्र अपने पिता की बात ना मानकर कुकर्म करने लगे। आगे के वचनों में हम देखते हैं कि किस तरह उनका पूरा परिवार सत्यानाश हो गया। 1 शमूएल 4:10 में और 18 में एली के पुत्रों तथा एली की मृत्यु के बारे में लिखा है।इसलिए हम सब प्रार्थना करे और एक अच्छा मसीही परिवार कहलाने योग्य जीवन जीयें।

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