सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, पवित्र दिन वोट क्यों नहीं डाल सकते

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के दौरान ईसाई समाज के त्यौहार आने के चलते सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मतदान की तारीख दोबारा तय करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया है।

याचिका में तमिलनाडु और पुडुचेरी में 18 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव की तारीख दोबारा तय करने की मांग की गई थी। एक ईसाई संस्था ने गुड फ्राइडे और ईस्टर के बीच मतदान होने के कारण इसे आगे बढ़ाने की मांग की है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि पवित्र दिन वोट क्यों नहीं डाल सकते, आखिर वोट डालने में कितना वक्त लगता है। वकील ने यह भी कहा था कि मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याचिका 22 मार्च को खारिज कर दी है, इसलिए उसे चुनौती देने वह सुप्रीम कोर्ट आए हैं।

जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘हम आपको यह सलाह नहीं देंगे कि किस तरह प्रार्थना करें और किस तरह वोट डालें।’ इस पीठ में जस्टिस एसए नजीर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी भी शामिल थीं।

पीठ ने कहा कि इस मामले की तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं है। वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं का कहना था कि घोषित मतदान की तारीख से पूरे ईसाई समुदाय को असुविधा होगी। वे अपनी धार्मिक परंपरा का निभाने के लिए स्वतंत्र रूप से चर्च नहीं जा सकेंगे।

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